घर के लिए वस्तु टिप्स

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घर यानि की हमारा निवास स्थान , हमारे लिए स्वर्ग समान है | इस घर में हम हमेशा खुश एवं तंदुरुस्त जीवन यापन के लिए,वास्तु के बारे में जानने की आवश्यकता होती  है | मानव की ग्रहस्थि  भले ही जितनी भी अच्छी हो अगर ग्रहस्थि का वास्तु ठीक न हो तो भाग्य आपके चौखट तक आ कर लौट जाती है | वैदिक वाटिका की ओर से घर का  वास्तु कैसा हो और इसमें रख रखाव और रहन सहन कैसे हो इनकी जानकारी दे रही है  |

वास्तु शास्त्र दिशाओ पे निर्भर करता है, दिशाएँ चार पूरब ,पश्चिम ,उत्तर ,दक्षिण होते हैं । और इनके बीच आने वाले  कोणों को ईसान्य, आग्नेय, नैरुत एवं वायव्य कहते हैं | 

  • पूरब और उत्तर के बीच आने वाली कोण-ईसान्य, 
  • पूरब और दक्षिण के बीच आने वाला कोण आग्नेय
  • पश्चिम और दक्षिण के बीच आने वाला कोण नैरुत
  • पश्चिम और उत्तर के बीच आने वाला कोणों के स्तिति एवं नाम | अब इन दिशाओं एवं कोणों की उपयोगिताओं के बारे में जाने|

र का मुख द्वार की पोजीशन या इसतरह से हो 

ईस्ट फेसिंग या पूरबमुखद्वार की तरफ न हो कर उत्तर के तरफ होना उचित है यानि कि इसान्य के ओर, नार्थ फेसिंग या ऊतरमुखद्वार घरों के लिए द्वार पूरब की तरफ अतः फिर ईशान्य की ओर होना उचित है | इस तरह के घरों में रहने वाले लोगों को पीढ़ी दर पीढ़ी सुख सम्पत्ति ,चैन और सुकून ,अच्छी सेहत और पूर्ण जीवन प्राप्त होता है |

  • मुख्यतः घरों में रसोई का स्थानआग्नेय दिशा में होना चाहिए और रसोई पूरब के तरफ मुख कर किया जाना चाहिए | 
  • आग्नेय में पानी का बहाव अतः नल न रखे इस कारण उस घर में पैसों की खर्च अधिक होगी| 
  • घर में कब्बोर्ड्स व अल्मारियाँ नैरुत में रखे और उन्हें खोलते वक्त हमारा मुख उत्तर या पूरब की ओर हो |
  • घर के मास्टर बेडरूम नैरुत में रखे और इसमें घर के बुजुर्ग या मालिक दक्षिण व पूरब की ओर सर(शीर्ष)रख कर सोना उचित है | इससे घर के सभी सदस्यों की सेहत एवं मनोदशा उत्तम होगी | 

वाश-बेसिंस के प्रयोग करते वक्त हमारा मुख पूरब व दक्षिण के तरफ न हो कर उत्तर या पश्चिम की ओर रहे।  इसे ध्यान में रख कर घरो में वाश बेसिन रखे |

सूचना : दक्षिण की ओर मूढ़कर कोई काम किया जाय, तो इसे उचित नहीं माना जाता है |

अगर आप इन छोटी सी बातों पर ध्यान दे कर और घर में  छोटे छोटे  बदलाव करके ईश्वर की कृपा से सुख, आनंद एवं  मंगलमय जीवन व्यतित कर सकते हैं |

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